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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 18
आपदर्थं धनं रक्षेद्दारान्रक्षेद्धनैरपि । आत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि ॥
आपत्ति के लिये धन की रक्षा करे, धन के द्वारा भी स्त्री की रक्षा करे, और स्त्री एवं धन, दोनों के द्वारा सदा अपनी रक्षा करे।
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