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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 17
त्यजेत्कुलार्थे पुरुषं ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत् । ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत् ॥
कुल की रक्षा के लिये एक मनुष्य का, ग्राम की रक्षा के लिये कुल का, देश की रक्षा के लिये गाँव का, और आत्मा के कल्याण के लिये सारी पृथ्वी का, त्याग कर देना चाहिये ।
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