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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 74
सन्धत्स्व त्वं कौरवान्पाण्डुपुत्रैर् मा तेऽन्तरं रिपवः प्रार्थयन्तु । सत्ये स्थितास्ते नरदेव सर्वे दुर्योधनं स्थापय त्वं नरेन्द्र ॥
कुरुराज! आप पाण्डवो से सन्धि कर ले, जिससे शत्रुओं को आपका छिद्र देखने का अवसर न मिल सके। नरदेव, समस्त पाण्डव सल्य पर डुटे हुए है, अब आप अपने पुत्र दुर्याधन को राकिये।
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