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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 73
मेढीभूतः कौरवाणां त्वमद्य त्वय्याधीनं कुरु कुलमाजमीढ । पार्थान्बालान्वनवास प्रतप्तान् गोपायस्व स्वं यशस्तात रक्षन् ॥
अज़मीढकुलनन्दन! इस समय आप ही कौरवों के आधार स्तम्भ हैं, कुरुवंश आपके ही अधीन है। तात! कुन्ती के पुत्र अभी बालक हैं, और वनवास से बहुत कष्ट पा चुके हैं, इस समय अपने यश की रक्षा करते हुए पाण्डवों का पालन कीजिये।
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