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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 72
धार्तराष्ट्राः पाण्डवान्पालयन्तु पाण्डोः सुतास्तव पुत्रांश्च पान्तु । एकारिमित्राः कुरवो ह्येकमन्त्रा जीवन्तु राजन्सुखिनः समृद्धाः ॥
राजन्! आपके पुत्र पाण्डवों की रक्षा करें ,और पाण्डु के पुत्र आपके पुत्रों की रक्षा करें, सभी कौरव एक-दूसरे के शत्रु को शत्रु, और मित्र को मित्र समझे। सबका एक ही कर्तव्य हो, सभी सुखी, और समृद्धिशाली होकर जीवन व्यतीत करें।
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