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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 70
पुरा ह्युक्तो नाकरोस्त्वं वचो मे द्यूते जितां द्रौपदीं प्रेक्ष्य राजन् । दुर्योधनं वारयेत्यक्षवत्यां कितवत्वं पण्डिता वर्जयन्ति ॥
राजन्! पहले जुए में द्रौपदी को जीती गयी देखकर, मैंने आपसे का था, आप छूत क्रीडा में आसक्त दर्योधन को रोकिये। विद्वान लोग इस के लिये मना करते हैं, कितु आपने मैरा कहना नहीं माना।
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