मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 7
मर्माण्यस्थीनि हृदयं तथासून् घोरा वाचो निर्दहन्तीह पुंसाम् । तस्माद्वाचं रुशतीं रूक्षरूपां धर्मारामो नित्यशो वर्जयीत ॥
इस जगत् में रूखी बातें मनुष्यों के मर्मस्थान, हड़ी, हुदय तथा प्राणीं को दग्ध करती रहती हैं, इसलिये धर्मानुरागी पुरुष जलाने वाली रूखी बातों को सदा के लिये परित्याग कर दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें