रोगार्दिता न फलान्याद्रियन्ते न वै लभन्ते विषयेषु तत्त्वम् ।
दुःखोपेता रोगिणो नित्यमेव न बुध्यन्ते धनभोगान्न सौख्यम् ॥
रोग से पीड़ित मनुष्य, मधुर फल का आदर नहीं करते, विषयों में भी कुछ सुख या सार नहीं मिलता। रोगी सदा ही दुखी रहते हैं, वे न धन सम्बन्धी भोगों का, और न सुख का ही अनुभव करते हैं।
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