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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 62
महानप्येकजो वृक्षो बलवान्सुप्रतिष्ठितः । प्रसह्य एव वातेन शाखा स्कन्धं विमर्दितुम् ॥
यदि वृक्ष अकला है तो वह बलवान्, दृढ़मूल, तथा बहुत बड़ा होने पर भी, एक ही क्षण ने आँधी के द्वारा बल पूर्वक, शाखाओ सहित धराशाइ किया जा सकता है।
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