स्वास्तीर्णानि शयनानि प्रपन्ना न वै भिन्ना जातु निद्रां लभन्ते ।
न स्त्रीषु राजन्रतिमाप्नुवन्ति न मागधैः स्तूयमाना न सूतैः ॥
राजन! आपस में फूट रखने वाले लोग, अच्छे बिछौनों से युक्त पलंग पाकर भी कभी सुख की नींद नहीं सो पाते, उन्हें स्त्रियों के पास रहकर, तथा सूत-मागधों द्वारा की हुई स्तुति सुनकर भी प्रसन्नता नहीं होती।
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