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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 52
बुद्ध्या भयं प्रणुदति तपसा विन्दते महत् । गुरुशुश्रूषया ज्ञानं शान्तिं त्यागेन विन्दति ॥
बुद्धि से मनुष्य अपने भव को दूर करता है, तपस्या से महत् पद को प्राप्त होता है, आध्यात्मिक गुरु की सेवा करने से, ज्ञान और शांति प्राप्त होती है।
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