मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 51
विदुर उवाच । नान्यत्र विद्या तपसोर्नान्यत्रेन्द्रिय निग्रहात् । नान्यत्र लोभसन्त्यागाच्छान्तिं पश्याम तेऽनघ ॥
विदुर जी बोले - पापशून्य नरेश! विद्या, तप, इन्द्रियनिग्रह, और लोभ त्याग के सिवा, और कोई आपके लिये शान्ति का उपाय मैं नहीं देखता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें