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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 46
पुनर्नरो म्रियते जायते च पुनर्नरो हीयते वर्धते पुनः । पुनर्नरो याचति याच्यते च पुनर्नरः शोचति शोच्यते पुनः ॥
मनुष्य बार-बार मरता और जन्म लेता है, बार- बार हानि उठाता और बड़ता है, बार-बार स्वयं दूसरे से याचना करता है, और दूसरे उससे यांचना करते हैं, तथा बारम्बार वह दूसरों के लिये शोक करता है, और टूसरे उसके लिये शोक करते हैं।
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