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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 45
अनवाप्यं च शोकेन शरीरं चोपतप्यते । अमित्राश्च प्रहृष्यन्ति मा स्म शोके मनः कृथाः ॥
जो अप्राप्य है, उसके लिए शरीर दुख से तड़पता है, और शत्रु प्रसन्न होते हैं। इसलिये आप मन में शोक न करें।
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