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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 42
सत्कृताश्च कृतार्थाश्च मित्राणां न भवन्ति ये । तान्मृतानपि क्रव्यादाः कृतघ्नान्नोपभुञ्जते ॥
जो मित्रो से सत्कार पाकर, और उनकी सहायता में कृत काय होकर भी उनके नहीं होते, ऐसे कृतघों के मरने पर उनका मांस माँसभोजी जन्तु भी नहीं खाते।
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