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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 41
अकस्मादेव कुप्यन्ति प्रसीदन्त्यनिमित्ततः । शीलमेतदसाधूनामभ्रं पारिप्लवं यथा ॥
दुष्ट पुरुषों का स्वभाव, मेध के समान चंचल होता है, वे सहसा क्रोध कर बैठते हैं, और अकारण ही प्रसन्न हो जाते हैं।
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