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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 34
तृणानि भूमिरुदकं वाक्चतुर्थी च सूनृता । सतामेतानि गेहेषु नोच्छिद्यन्ते कदा चन ॥
तृण का आसन, पृथ्वी, जल, और चौथी मीठी वाणी, सदाचारी के घर में, इन चार चीजों की कभी कमी नहीं होती।
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