गोभि: पशुभिरश्रैश्च कृष्या च सुसमृद्धया ।
कुलानि न प्ररोहन्ति यानि हीनानि वृत्ततः ॥
जो कुल सदाचार से हीन हैं, वे गौओं, पशुओं, घोड़ों, तथा हरी-भरी खेती से सम्पन्न होने पर भी, उन्रति नहीं कर पाते।
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