वृत्ततस्त्वविहीनानि कुलान्यल्पधनान्यपि ।
कुलसङ्ख्यां तु गच्छन्ति कर्षन्ति च मयद्यशः ॥
थोड़े धन वाले कुल भी यदि सदाचार से सम्पन्र हैं, तो वे अच्छे कुलों की गणना में आ जाते हैं, और महान् यश प्राप्त करते हैं ।
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