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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 22
धृतराष्ट्र उवाच । महाकुलानां स्पृहयन्ति देवा धर्मार्थवृद्धाश्च बहुश्रुताश् च । पृच्छामि त्वां विदुर प्रश्नमेतं भवन्ति वै कानि महाकुलानि ॥
धृतराष्ट्र ने कहा - विदुर! धर्म और अर्थ के नित्य ज्ञाता, एवं बहुश्रुत देवता भी, उत्तम कुल में उत्पन्न पुरुषों की इच्छा करते हैं। इसलिये मैं तुमसे यह प्रश्न करता हूँ, कि महान् (उत्तम) कुल कौन है?
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