न श्रद्दधाति कल्याणं परेभ्योऽप्यात्मशङ्कितः ।
निराकरोति मित्राणि यो वै सोऽधम पूरुषः ॥
जो अपने ही ऊपर संदह होने के कारण, दूसरों से भी कल्याण होने का विचार नहीं करता, मित्रो को भी दूर रखता है, अवश्य ही बह अधम पुरुष है।
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