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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 18
दुःशासनस्तूपहन्ता न शास्ता नावर्तते मन्युवशात्कृतघ्नः । न कस्य चिन्मित्रमथो दुरात्मा कलाश्चैता अधमस्येह पुंसः ॥
जिसका शासन अतयंत कठोर हो, जो अनेक दोषों से दृषित हो, कलंकित हो, जो क्रोध वश किसी की बुराई करने से नहीं हटता हो, दूसरों के किये हुए उपकार को नहीं मानता हो, जिसकी किसी के साथ मित्रता नहीं हो, ये अधम पुरुष के भेद हैं।
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