नानर्थकं सान्त्वयति प्रतिज्ञाय ददाति च ।
राद्धापराद्धे जानाति यः स मध्यमपूरुषः ॥
जो झुठी सान्त्वना नहीं देता, देने की प्रतिज्ञा कर के दे ही डालता है, दूसरों के दोषों को जानता है, वह मध्यम श्रेणी का पुरुष है।
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