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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 14
यतो यतो निवर्तते ततस्ततो विमुच्यते । निवर्तनाद्धि सर्वतो न वेत्ति दुःखमण्वपि ॥
मनुष्य जिन जिन विषयो से मन को हटाता जाता है, उन-उन से उसकी मुक्ति होती जाती है, इस प्रकार, यदि सब ओरस निवृत हो जाय, तो उसे लेश मात्र दुख का भी कभी अनुभव नहीं होता।
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