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विदुर नीति • अध्याय 4 • श्लोक 1
विदुर उवाच। अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्। आत्रेयस्य च संवादं साध्यानां चेति नः श्रुतम् ॥
विदुरजी कहते हैं - इस विषय में दरतात्रेय और साध्य देवताओं के संवाद रूप, इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया करते हैं, यह मेरा भी सुना हुआ है।
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