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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 9
विरोचन उवाच । प्राजापत्या हि वै श्रेष्ठा वयं केशिनि सत्तमाः । अस्माकं खल्विमे लोकाः के देवाः के द्विजातयः ॥
विरोचन ने कहा - केशिनी! हम प्रजापति की श्रेष्ठ संतानें हैं, अतः सबसे उत्तम हैं। यह सारा संसार हम लोगों का ही है। हमारे सामने देवता क्या हैं? और ब्राह्मण कौन चीज हैं?
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