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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 8
केशिन्युवाच । किं ब्राह्मणाः स्विच्छ्रेयांसो दितिजाः स्विद्विरोचन । अथ केन स्म पर्यङ्कं सुधन्वा नाधिरोहति॥
केशिनी बोली - विरोचन! ब्राह्मण श्रेष्ठ होते हैं या दैत्य? यदि ब्राह्मण श्रेष्ठ होते हैं, तो सुधन्वा ब्राह्मण ही मेरी शय्या पर क्यों न बैठे? अर्थात् मैं सुधन्वा से विवाह क्यों न करूँ?
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