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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 75
बुद्धिश्रेष्ठानि कर्माणि बाहुमध्यानि भारत । तानि जङ्घा जघन्यानि भारप्रत्यवराणि च ॥
भारत! बुद्धि से विचारकर किये हुए कर्म श्रेष्ठ होते हैं, बाहुबल से किये जाने वाले कर्म मध्यम श्रेणी के हैं, जांघों से होने वाले कार्य अधम हैं, और भार ढोने का काम महान् अधम है।
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