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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 7
विरोचनोsथ दैतेयस्तदा तत्राजगाम ह । प्राप्तुमिच्छंस्ततस्तत्र दैत्ये्ं प्राह केशिनी ॥
उसी समय दैल्यकुमार विरोचन, उसे प्राप्त करने की इच्छा से वहाँ आया। तब केशिनी ने वहाँ दैत्यराज से इस प्रकार बातचीत की।
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