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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 68
पूर्वे वयसि तत्कुर्याद्येन वृद्धसुखं वसेत् । यावज्जीवेन तत्कुर्याद्येन प्रेत्य सुखं वसेत् ॥
पहली अवस्था में वह काम करे, जिससे वृद्धावस्था में सुख पूर्वक रह सके, और जीवन भर वह कार्य करे, जिससे मरने के बाद भी सुख से रह सके।
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