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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 67
दिवसेनैव तत्कुर्याद्येन रातौ सुखं वसेत् । अष्ट मासेन तत्कुर्याद्येन वर्षाः सुखं वसेत् ॥
दिनभर में ही वह कार्य कर ले, जिससे रात में सुख से रह सके, और आठ महीनों में वह कार्य कर ले, जिससे वर्षा के चार महीने सुख से व्यतीत कर सके।
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