मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 63
वृद्धप्रज्ञः पुण्यमेव नित्यमारभते नरः । पुण्यं कुर्वन् पुण्यकीर्तिः पुण्यं स्थानं स्म गच्छति । तस्मात् पुण्यं निषेवेत पुरुष: सुसमाहितः ॥
जिसकी बुद्धि बढ़ जाती है, वह मनुष्य सदा पुण्य ही करता है। इस प्रकार पुण्यकर्मा मनुष्य पुण्य करता हुआ, पुण्यलोक को ही जाता है। इसलिये मनुष्य को चाहिये, कि वह सदा एकाग्रचित्त होकर पुण्य का ही सेवन करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें