जिसकी बुद्धि बढ़ जाती है, वह मनुष्य सदा पुण्य ही करता है। इस प्रकार पुण्यकर्मा मनुष्य पुण्य करता हुआ, पुण्यलोक को ही जाता है। इसलिये मनुष्य को चाहिये, कि वह सदा एकाग्रचित्त होकर पुण्य का ही सेवन करे।
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