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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 60
पापं कुर्वन्पापकीर्तिः पापमेवाश्नुते फलम् । पुण्यं कुर्वन्पुण्यकीर्तिः पुण्यमेवाश्नुते फलम् ॥
पाप कीर्ति वाला मनुष्य पापाचरण करता हुआ, पाप रूप फल को ही प्राप्त करता है, और पुण्यकर्मा मनुष्य, पुण्य करता हुआ अत्यन्त पुण्य फल का ही उपभोग करता है।
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