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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 6
स्वयंवरे स्थिता कन्या केशिनी नाम नामतः । रूपेणाप्रतिमा राजन् विशिष्टपतिकाम्यया ॥
राजन्! एक समय की बात है, केशिनी नाम वाली एक अनुपम सुन्दरी कन्या, सर्वश्रेष्ठ पति को वरण करने की इच्छा से, स्वयंवर-सभा में उपस्थित हुई।
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