अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा च कौल्यं च दमः श्रुतं च ।
पराक्रमश्चाबहु भाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ॥
आठ गुण पुरुष की शोभा बढ़ाते हैं - बुद्धि, कुलीनता, दम, शास्त्रज्ञान, पराक्रम, बहुत न बौलना, यथाशक्ति दान देना, और कृतज्ञ होना।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।