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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 51
श्रीर्मङ्गलात्प्रभवति प्रागल्भ्यात्सम्प्रवर्धते । दाक्ष्यात्तु कुरुते मूलं संयमात्प्रतितिष्ठति ॥
शुभ कर्मो से लक्ष्मी की उत्पत्ति होती है, प्रगल्मता से वह बढ़ती है, चतुरता से जड़ जमा लेती है, और संयम से सुरक्षित रहती है।
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