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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 45
मानाग्निहोत्रमुत मानमौनं मानेनाधीतमुत मानयज्ञः । एतानि चत्वार्यभयङ्कराणि भयं प्रयच्छन्त्ययथा कृतानि ॥
आदर के साथ अग्निहोत्र, आदरपूर्वक मौन का पालन, आदरपूर्वक स्वाध्या, और आदर के साथ यज्ञ का अनुष्ठान - ये चार कर्म भय को दूर करने वाले हैं, किंतु वे ही यदि ठीक तरह से सम्पादित न हों, तो भय प्रदान- करने वाले होते हैं।
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