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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 40
न देवा यष्टिमादाय रक्षन्ति पशुपालवत् । यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्ध्या संविभजन्ति तम् ॥
देवता लोग चरवाहों की तरह डण्डा लेकर पहरा नहीं देते। बे जिसकी रक्षा करना चाहते हैं, उसे उत्तम बुद्धि से युक्त कर देते हैं।
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