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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 4
यावत्कीर्तिर्मनुष्यस्य पुण्या लोकेषु गीयते । तावत्स पुरुषव्याघ्र स्वर्गलोके महीयते ॥
पुरुषश्रेष्ठ! इस लोक में, जब तक मनुष्य की पावन कीर्ति का गान किया जाता है, तब तक वह स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है।
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