विदुर उवाच ।
तस्माद्राजेन्द्र भूम्यर्थे नानृतं वक्तुमर्हसि ।
मा गमः स सुतामात्योऽत्ययं पुत्राननुभ्रमन् ॥
विदुर जी कहते हैं - इसलिये राजेन्द्र! आप पृथ्वी के लिये झूठ न बोलें। बेटे के स्वार्थ वश सच्ची बात न कहकर, पुत्र और मन्त्रियों के साथ विनाश के मुख में न जायेँ।
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