सुधन्वोवाच ।
यद्धर्ममवृणीथास्त्वं न कामादनृतं वदीः ।
पुनर्ददामि ते तस्मात्पुत्रं प्रह्राद दुर्लभम् ॥
सुधन्वा बोला - प्रहलाद! तुमने धर्म को ही स्वीकार किया है, स्वार्थ वश झूठ नहीं कहा है, इसलिये अब इस दुर्लभ पुत्र को फिर तुम्हें दे रहा हूँ।
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