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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 36
विरोचन सुधन्वायं प्राणानामीश्वरस्तव । सुधन्वन्पुनरिच्छामि त्वया दत्तं विरोचनम् ॥
विरोचन! अब सुधन्वा तुम्हारे प्राण का मालिक है। सुधन्वन्! अब यदि तुम दे दो तो, मैं विरोचन को दोबारा पाना चाहता हूं।
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