सुधन्वोवाच ।
यां रात्रिमधिविन्ना स्त्री यां चैवाक्ष पराजितः ।
यां च भाराभितप्ताङ्गो दुर्विवक्ता स्म तां वसेत् ॥
सुधन्वा बोला - सौत वाली स्त्री, जूए में हारे हुए जुआरी, और भार ढोने से व्यथित शरीर वाले मनुष्य की रात में जो स्थिति होती है, वही स्थिति उलटा न्याय देने वाले वक्ता की भी होती है।
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