सुधन्वोबाच गां प्रदद्यास्त्वौरसाय यद्वान्यत् स्यात् प्रियं धनम् ।
द्वयोर्विवदतोस्तथ्यं वाच्यं च मतिमंस्त्वया ॥
सुधन्वा बोला - मतिमन्! तुम्हारे पास गौ, तथा दूसरा जो कुछ भी प्रिय धन हो, वह सब अपने औरस पुत्र विरोचन को दे दो, परंतु हम दोनों के विवाद में तो, तुम्हें ठीक-ठीक उत्तर देना ही चाहिये।
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