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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 28
प्रह्लाद उवाच । पुर्तो वान्यो भवान्ब्रह्मन्साक्ष्ये चैव भवेत्स्थितः । तयोर्विवदतोः प्रश्नं कथमस्मद्विभो वदेत् ॥ २८ ॥
प्रह्लाद बोले - ब्रह्मन्! मेरे एक ही पुत्र है, और इधर तुम स्वयं उपस्थित हो, भला तुम दोनों के विवाद में मेरे जैसा मनुष्य, कैसे निर्णय दे सकता है?
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