सुधन्वोवाच ।
उदकं मधुपर्कं च पथ एवार्पितं मम ।
प्रह्राद त्वं तु नौ प्रश्नं तथ्यं प्रब्रूहि पृच्छतोः ॥
सुधन्वा बाला - प्रहाद! जल और मधुपर्क तो मुझे मार्ग में ही मिल गया है। तुम तो जो मैं पूछ रहा हूँ, उस प्रश्र का ठीक-ठीक उत्तर दो, क्या ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं अथवा विरोचन?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।