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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 26
प्रह्लाद उवाच । उदकं मधुपर्कं चाप्यानयन्तु सुधन्वने । ब्रह्मन्नभ्यर्चनीयोऽसि श्वेता गौः पीवरी कृता ॥
प्रहलाद ने कहा - सेवको! सुधन्वा के लिये जल और मधुपर्क लाओ। फिर सुधन्वा से कहा - ब्रह्मन्! तुम मेरे पूजनीय अतिथि हो, मैंने तुम्हारे लिये सफेद गौ, खूब मोटी-ताजी कर रखी है।
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