न मे सुधन्वना सख्यं प्राणयोर्विपणावहे ।
प्रह्राद तत्त्वामृप्च्छामि मा प्रश्नमनृतं वदीः ॥
विरोचन बोला - पिताजी ! सुधन्वा के साथ मेरी मित्रता नहीं हुई है। हम दोनों प्राणों की बाजी लगाये आ रहे हैं। मैं आपसे यथार्थ बात पूछता हूँ। मेरे प्रश्न का झूठा उत्तर न दीजियेगा।
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