किं वै सहैव चरतो न पुरा चरतः सह ।
विरोचनैतत्पृच्छामि किं ते सख्यं सुधन्वना ॥
विरोचन! मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या सुधन्वा के साथ तुम्हारी मित्रता हो गयी है? फिर कैसे एक साथ आ रहे हो? पहले तो तुम दोनों कभी एक साथ नहीं चलते थे।
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