प्रहाद ने (मन-ही-मन) कहा - जो कभी भी एक साथ नहीं चले थे, वे ही दोनों, ये सुधन्वा और विरोचन, आज साँप की तरह क्रुद्ध होकर, एक ही राह से आते दिखायी देते है।
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